गाजीपुर ।
दिनांक 23 जनवरी 2026 को नैनो उर्वरक जागरूकता अभियान के अन्तर्गत इफको द्वारा कृषि विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम कृषि भवन, गाजीपुर में आयोजित किया गया ।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य नैनो तकनीक आधारित उर्वरकों के वैज्ञानिक, संतुलित एवं पर्यावरण-अनुकूल उपयोग के प्रति कृषि अधिकारियों को प्रशिक्षित कर किसानों तक सही जानकारी पहुँचाना रहा ।
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उप कृषि निदेशक श्री विजय कुमार रहे। विशिष्ट अतिथियों में जिला कृषि अधिकारी गाजीपुर श्री उमेश कुमार, इफको गोरखपुर के वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक डॉ. विनोद कुमार सिंह, इफको क्षेत्र अधिकारी गाजीपुर सचिन तिवारी, तकनीकी सहायक पारसनाथ, एसएफए हॉट स्पॉट इफको वेद प्रकाश राय, इफको ई-बाजार रेवतीपुर के विक्रय अधिकारी हरीश कुमार मिश्रा तथा इफको एमसी के अमित सिंह उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सहायक विकास अधिकारी कृषि, तकनीकी सहायक कृषि सहित लगभग 80 कृषि कर्मियों ने प्रतिभाग किया ।
प्रशिक्षण सत्र में इफको क्षेत्र अधिकारी द्वारा फसलों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की जानकारी देते हुए नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया प्लस के प्रयोग की विधि एवं लाभों को विस्तार से समझाया गया। उन्होंने बताया कि नैनो डीएपी का 5 मिलीलीटर प्रति किलोग्राम बीज की दर से बीज शोधन तथा 5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से जड़ शोधन कर आधे घंटे सुखाने के बाद बुवाई/रोपाई करनी चाहिए। फसल में पत्तियाँ आने पर नैनो यूरिया प्लस एवं नैनो डीएपी को एक साथ 4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई। दूसरी टॉप-ड्रेसिंग में दानेदार यूरिया के स्थान पर नैनो यूरिया के पर्णीय छिड़काव पर जोर दिया गया। धान में जिंक की कमी के लक्षण दिखने पर नैनो जिंक को 1–2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की जानकारी दी गई ।
जिला कृषि अधिकारी श्री उमेश कुमार ने किसानों से फास्फेटिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग को कम करते हुए नैनो यूरिया, नैनो डीएपी एवं सागरिका के अधिकाधिक प्रयोग की अपील की। वहीं इफको के वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक डॉ. वी. के. सिंह ने कहा कि नैनो उर्वरकों के प्रयोग से किसानों की लागत में कमी आती है और यूरिया-डीएपी के अंधाधुंध उपयोग से होने वाले जल, मृदा एवं पर्यावरणीय नुकसान से भी बचाव होता है। उन्होंने रबी सीजन में गेहूं, सरसों, आलू, चना व मटर जैसी प्रमुख फसलों में नैनो डीएपी से बीज शोधन कर बुवाई करने तथा दानेदार डीएपी की मात्रा आधी करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि 500 मिलीलीटर नैनो डीएपी से 100 किलोग्राम बीज का शोधन संभव है, जिसकी कीमत मात्र ₹600 है, जो दानेदार डीएपी की तुलना में किफायती है और इससे उत्पादन के साथ-साथ उत्पाद की गुणवत्ता भी बेहतर होती है ।
इस कार्यक्रम के समापन पर मुख्य अतिथि उप कृषि निदेशक श्री विजय कुमार ने किसानों को संतुलित मात्रा में उर्वरकों के उपयोग के साथ नैनो तकनीक आधारित नैनो यूरिया प्लस, नैनो डीएपी एवं नैनो जिंक अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने दानेदार उर्वरकों पर भारत सरकार द्वारा दी जा रही भारी सब्सिडी की जानकारी देते हुए कहा कि नैनो उर्वरक भविष्य की खेती के लिए टिकाऊ, किफायती और पर्यावरण-हितैषी विकल्प हैं ।
इस कार्यक्रम को उपस्थित अधिकारियों व कर्मचारियों ने अत्यंत उपयोगी बताते हुए इसे किसानों तक व्यापक रूप से पहुँचाने का संकल्प लिया।










