वरिष्ठ कवि अनन्तदेव पाण्डेय ‘अनन्त’ हुए सम्मानित ,हिन्दी हमारी संस्कृति, संवेदना और राष्ट्रीय अस्मिता की सशक्त अभिव्यक्ति…।

हिन्दी हमारी संस्कृति, संवेदना और राष्ट्रीय अस्मिता की सशक्त अभिव्यक्ति
हिन्दी का वर्तमान एवं भविष्य विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित, वरिष्ठ कवि अनन्तदेव पाण्डेय ‘अनन्त’ सम्मानित
गाजीपुर।
साहित्य चेतना समाज के तत्वावधान में ‘चेतना-प्रवाह’ कार्यक्रम के तहत हिन्दी दिवस की पूर्व संध्या पर नगर के गोलाघाट स्थित बाबा जागेश्वरनाथ मंदिर के सभागार में ‘हिन्दी का वर्तमान एवं भविष्य’ विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि अनन्तदेव पाण्डेय ‘अनन्त’ ने की, जबकि संचालन डीएवी इंटर कॉलेज के हिन्दी शिक्षक डॉ. संतोष तिवारी ने किया।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए हिन्दू इंटर कॉलेज, जमानियां की हिन्दी शिक्षिका डॉ. ऋचा राय ने कहा कि हिन्दी भाषा में समन्वय की अद्भुत क्षमता है। इसकी लिपि वैज्ञानिक है तथा लेखन और वाचन में समानता है। उन्होंने कहा कि विज्ञापन की भाषा हिन्दी को विकृत कर रही है। हिन्दी भारतीय संस्कृति की संवाहिका होने के साथ ही निज गौरव की प्रतीक भी है।
पीजी कॉलेज मलिकपुरा के हिन्दी प्राध्यापक डॉ. सर्वेश पाण्डेय ने कहा कि हिन्दी केवल शब्द-संपदा नहीं, बल्कि भारत की संवेदना और संस्कृति की चेतना है। जनभाषा और संपर्क भाषा से लेकर राजभाषा तक की यात्रा तय करते हुए हिन्दी आज विश्व भाषा के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है।

साहित्य चेतना समाज के संस्थापक अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ ने कहा कि हिन्दी मात्र एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, संवेदना और राष्ट्रीय अस्मिता की सशक्त अभिव्यक्ति है। आज हिन्दी विश्व की प्रमुख भाषाओं में शामिल है और देश-विदेश में करोड़ों लोग इसे बोलते, समझते और लिखते हैं। डिजिटल युग, सोशल मीडिया और तकनीकी विकास ने हिन्दी के प्रसार के नए द्वार खोले हैं। इंटरनेट, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल माध्यमों पर हिन्दी का प्रयोग निरंतर बढ़ रहा है। उन्होंने हिन्दी को वैज्ञानिक, तकनीकी और रोजगार की भाषा के रूप में और अधिक विकसित करने की आवश्यकता जताई।
डॉ. संतोष तिवारी ने भारतेन्दु हरिश्चंद्र के प्रसिद्ध कथन—‘निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल’ का उल्लेख करते हुए कहा कि अपनी संस्कृति और भाषा का विकास अपनी भाषा के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने कहा कि हिन्दी दुनिया में सर्वाधिक बोली जाने वाली प्रमुख भाषाओं में शामिल है।
पीजी कॉलेज गाजीपुर के अर्थशास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. श्रीकांत पाण्डेय ने कहा कि हिन्दी का वर्तमान और भविष्य दोनों ही उज्ज्वल हैं। आज हिन्दी में उच्च कोटि के साहित्य का सृजन हो रहा है और यह रोजगार का माध्यम भी बन रही है। हिन्दी एक प्रवाहमान भाषा है, जिसमें अन्य भाषाओं के शब्दों को आत्मसात करने की अद्भुत क्षमता है। उन्होंने कहा कि हिन्दी के स्वरूप को लेकर अनावश्यक मानकीकरण की आवश्यकता नहीं है। बाजार और सियासत के प्रभाव से अन्य हिन्दीभाषी क्षेत्रों के बाहर के लोग भी हिन्दी का प्रयोग कर रहे हैं।
श्री सुदृष्टि बाबा पीजी कॉलेज, रानीगंज, बलिया के प्राचार्य डॉ. संतोष कुमार सिंह ने कहा कि हिन्दी ने उदारतापूर्वक अनेक भाषाओं के शब्दों को आत्मसात कर अपने शब्द भंडार को समृद्ध किया है। वैश्विक स्तर पर हिन्दी के विस्तार में साहित्यकारों के साथ-साथ संचार और आधुनिक तकनीकी माध्यमों का भी महत्वपूर्ण योगदान है।
इस अवसर पर 93 वर्षीय वरिष्ठ कवि अनन्तदेव पाण्डेय ‘अनन्त’ को उनके दीर्घ साहित्यिक योगदान के लिए माल्यार्पण कर एवं अंगवस्त्रम प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसके बाद उन्होंने एकल काव्य पाठ प्रस्तुत करते हुए अपनी विभिन्न रचनाएं सुनाईं।
कार्यक्रम में संस्था के संगठन सचिव प्रभाकर त्रिपाठी, अरुण तिवारी, अनिल उपाध्याय, आनंद प्रकाश अग्रवाल, राजू सिंह मौर्य, डॉ. पारसनाथ सिंह, आनंद तिवारी, गोपाल गौरव, राघवेन्द्र ओझा, विनय तिवारी, मनोज यादव ‘बेफिक्र’, प्रांशु उपाध्याय, संजीव, अरुण कुमार, डॉ. सूर्यनाथ पाण्डेय, छोटेलाल सिंह, नागेश मिश्र आदि मौजूद रहे। अंत में शैलेन्द्र तिवारी ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।



