करोड़ों के भुगतान में अनियमितता के आरोपों पर नपा अध्यक्ष सरिता अग्रवाल को शासन का नोटिस….।
18 शिकायत बिंदुओं की जांच में सात पर प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने का उल्लेख; 15 दिन में जवाब देने का निर्देश……।

गाजीपुर ।
नगर पालिका परिषद गाजीपुर की अध्यक्ष सरिता अग्रवाल के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी शिकायतों के मामले में उत्तर प्रदेश शासन ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नगर विकास अनुभाग-6, लखनऊ की ओर से पांच अक्टूबर 2026 को जारी नोटिस में 18 बिंदुओं पर की गई जांच के बाद सात मामलों में प्रथम दृष्टया आरोप सिद्ध होने का उल्लेख किया गया है। इस कार्रवाई की जानकारी सामने आने के बाद नगर पालिका प्रशासन में हलचल तेज हो गई है।
शासन की ओर से जारी नोटिस के अनुसार, शिकायतों की जांच के लिए तत्कालीन जिलाधिकारी ने तीन सदस्यीय समिति गठित की थी। इसमें तत्कालीन मुख्य राजस्व अधिकारी, उपजिलाधिकारी और वित्त एवं लेखाधिकारी, बेसिक शिक्षा को शामिल किया गया था। समिति की जांच आख्या 20 मई 2026 को प्राप्त हुई थी। इसके बाद तत्कालीन जिलाधिकारी की ओर से 26 मई और 27 जुलाई 2026 को उपलब्ध कराई गई जांच आख्या के आधार पर सात मामलों में प्रथम दृष्टया वित्तीय अनियमितता पाए जाने का उल्लेख किया गया है।
नगर विकास अनुभाग-6 के विशेष सचिव उदय भानु त्रिपाठी की ओर से जारी नोटिस में नगर पालिका अधिनियम, 1916 की धारा 48 के तहत आगे की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। नोटिस में कहा गया है कि संबंधित आरोपों के संबंध में निर्धारित अवधि के भीतर जवाब नहीं मिलने पर उपलब्ध अभिलेखों और मामले के गुण-दोष के आधार पर आगे की कार्रवाई शुरू की जा सकती है।
नोटिस की प्रतिलिपि आयुक्त, वाराणसी मंडल, निदेशक स्थानीय निकाय, लखनऊ, जिलाधिकारी गाजीपुर, सचिव लोकायुक्त और नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी को भी भेजी गई है। जिलाधिकारी को निर्देश दिया गया है कि नोटिस की तामील नगर पालिका अध्यक्ष को कराकर इसकी सूचना शासन को उपलब्ध कराएं।
इन सात मामलों में जताई गई अनियमितता की आशंका
1. राज्य वित्त आयोग की धनराशि से भुगतान का मामला: वर्ष 2016-17 में सड़क निर्माण के लिए राज्य वित्त आयोग से प्राप्त धनराशि से जुड़े भुगतान में मद परिवर्तन के लिए सक्षम अधिकारी की स्वीकृति नहीं मिलने का उल्लेख है। जांच आख्या के अनुसार, मेसर्स अम्बे इंटरप्राइजेज, टेढ़ी बाजार को वर्ष 2020-21 में 38,31,734 रुपये का भुगतान किया गया। अभिलेखों में सक्षम स्तर से अनुमोदन प्राप्त होने का प्रमाण उपलब्ध नहीं पाया गया।
2. गर्ग ट्यूब एजेंसी से ईदगाह तक सड़क और नाला निर्माण: इस कार्य के लिए 23.34 लाख रुपये की निविदा स्वीकृत हुई थी। जांच में कुल भुगतान 27,22,091 रुपये होने का उल्लेख है, जो स्वीकृत निविदा राशि से 3,88,091 रुपये अधिक है।
3. बंधीबाजार में कृषि भवन से लोहिया भवन तक निर्माण: सड़क की दक्षिणी पटरी पर इंटरलॉकिंग पेवमेंट और नाला निर्माण से संबंधित भुगतान में अनियमितता का आरोप है। नोटिस में इस कार्य के भुगतान और स्वीकृत निविदा राशि के बीच अंतर की जांच का उल्लेख किया गया है। उपलब्ध मूल विवरण में इस मामले की कुछ धनराशियों का मिलान स्पष्ट नहीं है।
4. एलआईसी चौराहे से आरआर इंटरनेशनल स्कूल तक सड़क और नाली निर्माण: इस कार्य के लिए स्वीकृत निविदा राशि 34.14 लाख रुपये बताई गई है। जांच विवरण के अनुसार, कुल भुगतान 52,39,182 रुपये हुआ, जो स्वीकृत राशि से 18,25,182 रुपये अधिक है।
5. आमघाट सरकारी कॉलोनी से गांधी पार्क होते हुए कोतवाली मुख्य मार्ग तक सड़क निर्माण: सड़क की पटरियों के चौड़ीकरण, नाली मरम्मत और नाली के ढक्कन निर्माण से जुड़े कार्य में 22,57,750 रुपये के स्वीकृत आगणन के मुकाबले लगभग 39.24 लाख रुपये भुगतान किए जाने का उल्लेख है।
6. गजल होटल के पीछे से कोतवाली गेट तक पीसी कार्य: नाली से नाली तक सड़क निर्माण से जुड़े इस मामले में 12 लाख रुपये की स्वीकृत राशि के मुकाबले 19.12 लाख रुपये का भुगतान किए जाने की बात जांच में सामने आई है।
7. अफीम फैक्ट्री से नगरपालिका चौराहे तक सड़क निर्माण: सड़क की दोनों पटरियों पर रबरयुक्त मोल्डेड इंटरलॉकिंग पेवमेंट और आवश्यकतानुसार नाला निर्माण के लिए 24 लाख रुपये की निविदा राशि के मुकाबले 36.73 लाख रुपये भुगतान किए जाने का उल्लेख है।
जिलाधिकारी के माध्यम से मांगा गया जवाब
शासन की ओर से जारी नोटिस में संबंधित आरोपों पर नगर पालिका अध्यक्ष से अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा गया है। नोटिस के मुताबिक, आरोपों की गंभीरता को देखते हुए निर्धारित समय में जवाब देना आवश्यक है। जवाब प्राप्त होने के बाद उपलब्ध अभिलेखों और मामले के गुण-दोष के आधार पर आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जा सकता है।
फिलहाल यह मामला कारण बताओ नोटिस और जांच में सामने आए प्रथम दृष्टया आरोपों के स्तर पर है। अंतिम कार्रवाई शासन की आगे की प्रक्रिया और संबंधित पक्ष के जवाब के आधार पर तय होगी।
















