गाजीपुर में युवती सम्मेलन का आयोजन, नारी शक्ति और पंच परिवर्तन पर हुआ मंथन….।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, काशी प्रांत के सम्मेलन में युवतियों ने राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का लिया संकल्प....।

गाजीपुर।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, काशी प्रांत द्वारा गाजीपुर जिले में युवती सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में नारी शक्ति, पंच परिवर्तन तथा वर्तमान समय में महिलाओं की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
मुख्य वक्ता मनोज जी, क्षेत्र संपर्क प्रमुख, पूर्वी उत्तर प्रदेश ने नारी शक्ति की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय समाज में महिलाओं की भूमिका केवल परिवार तक सीमित नहीं रही है, बल्कि राष्ट्र निर्माण के प्रत्येक क्षेत्र में महिलाओं ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने युवतियों से अपनी क्षमताओं को पहचानकर समाज और राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
सम्मेलन में पंच परिवर्तन के पांच प्रमुख आयामों—सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, ‘स्व’ आधारित जीवनशैली एवं स्वदेशी तथा नागरिक कर्तव्य—पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि पंच परिवर्तन केवल विचार या भाषण का विषय नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में अपनाए जाने वाला व्यवहार है। व्यक्ति से परिवार, परिवार से समाज और समाज से राष्ट्र निर्माण की यात्रा इन्हीं सकारात्मक परिवर्तनों से संभव है।
संगीता बलवंत, राज्यसभा सांसद ने महिलाओं की वर्तमान सामाजिक भूमिका और बदलते समय में उनके बढ़ते योगदान पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सशक्त महिला केवल स्वयं आगे नहीं बढ़ती, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र को भी नई दिशा देने की क्षमता रखती है।
डॉ. शिखा तिवारी ने युवतियों को आत्मविश्वास, शिक्षा और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से अपनी भूमिका मजबूत करने के लिए प्रेरित किया। वहीं सुश्री अर्चना चौधरी, जिला छात्रा संयोजक की भी प्रमुख उपस्थिति रही।
सम्मेलन के दौरान युवतियों को पंच परिवर्तन को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया गया। प्रतिभागियों को यह विचार दिया गया कि परिवर्तन की शुरुआत किसी बड़े अभियान से नहीं, बल्कि स्वयं से की जा सकती है—चाहे वह परिवार के साथ संवाद हो, पर्यावरण संरक्षण का संकल्प हो, स्वदेशी वस्तुओं को प्राथमिकता देना हो या अपने नागरिक कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना।
कार्यक्रम का संदेश रहा कि जब प्रत्येक नागरिक सकारात्मक परिवर्तन की जिम्मेदारी स्वयं स्वीकार करेगा, तभी एक सशक्त समाज और आत्मनिर्भर, संस्कारित एवं राष्ट्र-केंद्रित भारत का निर्माण संभव होगा।















