डीपीडीपी एक्ट में निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए स्पष्ट छूट जरूरी :– जेसीआई
डीएनपीए की सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका का जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया ने किया समर्थन, पत्रकारिता की स्वतंत्रता और समाचार स्रोतों की गोपनीयता पर जताई चिंता...।

नई दिल्ली ।
डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 (डीपीडीपी एक्ट) में पत्रकारिता के लिए स्पष्ट और व्यापक छूट का प्रावधान किया जाना आवश्यक है। पत्रकारों को समाचार स्रोतों की गोपनीयता बनाए रखने और जनहित से जुड़े मामलों की स्वतंत्र रूप से पड़ताल करने का अधिकार मिलना चाहिए। इन अधिकारों पर प्रतिबंध निष्पक्ष पत्रकारिता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया (जेसीआई) ने डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) की ओर से इस कानून को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका का समर्थन करते हुए यह मांग उठाई है।
जेसीआई के राष्ट्रीय सलाहकार डॉ. ए.के. राय ने संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनुराग सक्सेना के हवाले से कहा कि पत्रकारिता के लिए स्पष्ट कानूनी छूट का अभाव खोजी पत्रकारिता और जनहित से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग को प्रभावित कर सकता है। भ्रष्टाचार, प्रशासनिक अनियमितताओं और अन्य सार्वजनिक महत्व के मुद्दों की पड़ताल के दौरान पत्रकारों को कई बार व्यक्तिगत या संवेदनशील जानकारियों का इस्तेमाल करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक जानकारी के उपयोग या प्रकाशन से पहले संबंधित व्यक्ति की सहमति लेना अनिवार्य हो, तो जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को सामने लाने में व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा हो सकती हैं। इसलिए अधिनियम में पत्रकारिता के लिए स्पष्ट कानूनी संरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
धारा 17 में पत्रकारिता छूट बहाल करने की मांग
जेसीआई ने विशेष रूप से डीपीडीपी एक्ट की धारा 17 में पत्रकारिता संबंधी छूट को पुनः शामिल करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि पूर्ववर्ती मसौदे में पत्रकारिता के लिए इस प्रकार की छूट का प्रस्ताव था। इसे कानून में स्पष्ट रूप से शामिल करना निष्पक्ष और स्वतंत्र पत्रकारिता के हित में आवश्यक है।
समाचार स्रोतों की गोपनीयता पर चिंता
जेसीआई ने अधिनियम की धारा 36 के तहत सरकार को प्राप्त जानकारी मांगने संबंधी शक्तियों को लेकर भी चिंता जताई है। डॉ. सक्सेना के अनुसार, पत्रकारों और उनके समाचार स्रोतों की गोपनीयता स्वतंत्र पत्रकारिता का महत्वपूर्ण आधार है। खोजी पत्रकारिता में कई सूचनाएं ऐसे स्रोतों से प्राप्त होती हैं, जिनकी पहचान सार्वजनिक होने पर उन्हें परेशानी या जोखिम का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि समाचार स्रोतों की पहचान सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त कानूनी संरक्षण जरूरी है, ताकि पत्रकार बिना किसी अनुचित दबाव के जनहित से जुड़े मामलों की पड़ताल कर सकें।
इसके साथ ही जेसीआई ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(जे) में पूर्ववर्ती व्यवस्था बहाल करने और डीपीडीपी एक्ट की धारा 44(3) के प्रभावों की समीक्षा करने की मांग भी की है। संगठन का कहना है कि व्यक्तिगत निजता की सुरक्षा और जनहित में आवश्यक सूचनाओं तक नागरिकों की पहुंच के बीच संतुलन बनाए रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
17 नवंबर की सुनवाई पर नजर
जेसीआई ने सर्वोच्च न्यायालय से आग्रह किया है कि मामले की आगामी सुनवाई के दौरान प्रेस की स्वतंत्रता, खोजी पत्रकारिता, समाचार स्रोतों की गोपनीयता और जनहित में सूचना तक पहुंच से जुड़े पहलुओं पर भी विचार किया जाए। संगठन का मानना है कि डेटा संरक्षण और निजता की सुरक्षा के उद्देश्यों के साथ पत्रकारिता की स्वतंत्र भूमिका को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।
डॉ. अनुराग सक्सेना ने बताया कि जेसीआई पत्रकारों और पत्रकारिता से जुड़े हितों को न्यायालय के समक्ष रखने के लिए हस्तक्षेप याचिका दाखिल करने पर भी विचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का दायरा केवल समाचार प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि जनहित के मुद्दों को सामने लाना और सार्वजनिक संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उसका महत्वपूर्ण दायित्व है।
जेसीआई ने देशभर के पत्रकारों से प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारिता से जुड़े संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण के लिए लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने की अपील की है। संगठन ने कहा कि डेटा संरक्षण संबंधी कानून बनाते और लागू करते समय निजता के अधिकार तथा प्रेस की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।















