चारागाह की जमीन से अतिक्रमण हटाने के दौरान हरे पेड़ काटने का आरोप…।
ग्रामीण ने प्रधान और लेखपाल पर बिना अनुमति आम-नीम के पेड़ कटवाने का लगाया आरोप, तहसीलदार बोले- कोई बड़ा पेड़ नहीं काटा गया...।

गाजीपुर ।
सदर ब्लॉक की ग्राम पंचायत बायपुर में चारागाह की भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हरे पेड़ों की कटाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीण संतोष यादव ने ग्राम प्रधान और हल्का लेखपाल पर बिना अनुमति आम, नीम सहित अन्य हरे और फलदार पेड़ों को कटवाने का आरोप लगाया है। उन्होंने मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं, तहसील प्रशासन ने किसी बड़े पेड़ की कटाई से इनकार किया है।
ग्रामीण संतोष यादव का आरोप है कि चारागाह की सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाना जरूरी था, लेकिन इस दौरान वहां लगे हरे पेड़ों और छोटे पौधों को भी काटकर हटा दिया गया। उनका दावा है कि आम और नीम के कुछ पेड़ों को काटने के बाद उनकी लकड़ियां भी मौके से हटा दी गईं। उन्होंने आशंका जताई कि काटी गई लकड़ी को कहीं और ले जाकर बेचा गया हो सकता है।
संतोष यादव ने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि मौके पर पहले से मौजूद पेड़ों की संख्या और उनकी प्रजातियों का सत्यापन कराया जाए। साथ ही यह भी जांच की जाए कि पेड़ों की कटाई के लिए किसी सक्षम अधिकारी से अनुमति ली गई थी या नहीं। उन्होंने अतिक्रमण हटाने के आदेश और पेड़ों की कटाई से संबंधित अभिलेखों की भी जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीण का कहना है कि सरकारी चारागाह की भूमि पर लगे पेड़ों को नुकसान पहुंचाना सरकारी संपत्ति और पर्यावरण दोनों के लिहाज से गंभीर मामला है। यदि जांच में बिना वैधानिक अनुमति पेड़ों की कटाई की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने काटी गई लकड़ी का पता लगाकर सरकारी संपत्ति को हुए संभावित नुकसान की भरपाई कराने की भी मांग की है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1976 और अन्य लागू प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग करते हुए यह स्पष्ट करने को कहा है कि अतिक्रमण हटाने के दौरान पेड़ों को हटाने का निर्देश किस स्तर से दिया गया था।
साढ़े तीन बीघा चारागाह भूमि कराई गई अतिक्रमण मुक्त
इस मामले में सदर तहसीलदार ने बताया कि चारागाह की करीब साढ़े तीन बीघा भूमि पर अवैध अतिक्रमण किया गया था, जिसे प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान खाली कराया गया है। उन्होंने कहा कि जिस पेड़ को लेकर आपत्ति जताई जा रही है, उस पर विपक्षी पक्ष अपना दावा कर रहा है।
तहसीलदार के अनुसार, मौके पर छोटे-छोटे जंगली पौधे और झाड़ियां थीं, जिन्हें साफ कराया गया है। किसी बड़े पेड़ को नहीं काटा गया है। उन्होंने बताया कि अतिक्रमण मुक्त कराई गई भूमि पर अब आवारा पशुओं के लिए चारे की बुवाई कराई जाएगी, ताकि चारागाह की जमीन का उपयोग उसके निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप किया जा सके।
फिलहाल ग्रामीण द्वारा लगाए गए पेड़ कटाई के आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि कार्रवाई के दौरान पेड़ों की कटाई हुई थी या नहीं और यदि हुई तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है।














