डिप्टी सीएम के आगमन से पहले छात्र प्रतिनिधि हाउस अरेस्ट , उठी विरोध की आवाज़….।
मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर 12 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन देने जा रहे थे छात्र नेता...।

गाजीपुर ।
उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक के गाजीपुर आगमन से पहले मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य सुविधाओं और जनसमस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपने जा रहे छात्र प्रतिनिधियों को पुलिस प्रशासन ने शनिवार सुबह उनके आवास पर नजरबंद कर दिया। पीजी कॉलेज, गाजीपुर के पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष दीपक उपाध्याय के आवास पर पुलिस बल तैनात कर उन्हें और उनके साथ मौजूद छात्र प्रतिनिधियों प्रद्युम्न सिंह यादव राजन, आकाश चौधरी तथा सतीश चौधरी को घर से बाहर निकलने से रोक दिया गया।
पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष दीपक उपाध्याय ने आरोप लगाया कि वे महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय की स्वास्थ्य सुविधाओं और जिले की चिकित्सा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को लेकर उप मुख्यमंत्री को मांग पत्र सौंपने जा रहे थे। उन्होंने कहा कि गाजीपुर की जनता को केवल रेफरल सेंटर नहीं, बल्कि ऐसा मेडिकल कॉलेज चाहिए जहां गंभीर मरीजों को समुचित और समय पर उपचार मिल सके।
छात्र नेता प्रद्युम्न सिंह यादव राजन ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा प्रत्येक नागरिक के लिए जरूरी है। उनका आरोप है कि अस्पताल में दवाओं, अल्ट्रासाउंड और इमरजेंसी सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं आकाश चौधरी और सतीश चौधरी ने पुलिस की कार्रवाई को जनसमस्याओं को उठाने से रोकने वाला कदम बताते हुए कहा कि वे स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर अपना आंदोलन जारी रखेंगे।
ये हैं 12 प्रमुख मांगें
छात्र प्रतिनिधियों की ओर से तैयार मांग पत्र में चिकित्सा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 12 प्रमुख मांगें रखी गई हैं। इनमें गोरा बाजार स्थित ट्रॉमा सेंटर को 24 घंटे विशेषज्ञ डॉक्टरों और वेंटिलेटर सुविधा के साथ शुरू करना, पुरुष अस्पताल की इमरजेंसी में दिन-रात वरिष्ठ चिकित्सकों की मौजूदगी सुनिश्चित करना और गंभीर रोगों के विशेषज्ञों की सातों दिन ओपीडी संचालित करना शामिल है।
इसके अलावा ओपीडी अल्ट्रासाउंड शुरू करने के लिए स्थायी रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति, महिला अस्पताल में समर्पित पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड सुविधा, सीटी स्कैन, एमआरआई और अल्ट्रासाउंड जैसी जांचों को 24 घंटे उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
मांग पत्र में आवश्यक एवं जीवनरक्षक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने, ऑपरेशन थिएटर को सातों दिन संचालित करने, डायलिसिस बेड की संख्या 25 से बढ़ाकर 50 करने तथा ALS एंबुलेंस और शव वाहनों की संख्या बढ़ाने की मांग भी शामिल है।
इसके साथ ही अस्पताल की खराब लिफ्ट और जांच मशीनों की मरम्मत, अस्पताल परिसर के बाहर व्यवस्थित पार्किंग और सुरक्षा गार्डों की तैनाती तथा पेयजल, शौचालय, स्नानघर और तीमारदारों के लिए विश्राम स्थल जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि इन समस्याओं का समाधान होने से जिले के मरीजों को गंभीर उपचार के लिए दूसरे शहरों, विशेषकर वाराणसी, जाने की आवश्यकता कम होगी।














