भव्य शोभायात्रा में दिखी लोहार, ठठेरा, बढ़ई, सोनार व शिल्पकार समाज की कला-संस्कृति.….।
एकजुटता से ही विश्वकर्मा समाज का विकास संभव :-- हरेंद्र विश्वकर्मा

मधुबन (मऊ )।
भगवान विश्वकर्मा की जयंती के अवसर पर रविवार को श्री विश्वकर्मा मंदिर जन कल्याण सेवा समिति डुमरी मर्यादपुर के तत्वावधान में भगवान विश्वकर्मा की शोभायात्रा एवं पूजन समारोह का भव्य आयोजन किया गया। शोभायात्रा में लोहार, ठठेरा, बढ़ई, सोनार और शिल्पकार समाज के लोगों ने अपने पारंपरिक हुनर एवं कला का प्रदर्शन किया। भगवान विश्वकर्मा के पांचों पुत्रों की झांकी और भारत माता की प्रतिमा के स्वरूप में प्रस्तुत राष्ट्र संदेश देने वाली झांकी आकर्षण का केंद्र रही।

शोभायात्रा दुबारी मोड़ से शुरू होकर भैरोपुर मोड़ स्थित एक स्थानीय मैरिज हाल पहुंची, जहां सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मऊ के साथ ही गाजीपुर, बलिया, आजमगढ़, देवरिया, बस्ती, गोरखपुर, जौनपुर, बड़हलगंज और वाराणसी सहित विभिन्न जनपदों से विश्वकर्मा समाज के लोग शामिल हुए। महिलाओं की भी बड़ी संख्या में भागीदारी रही। लंबे समय बाद क्षेत्र में इस तरह का सामाजिक समागम देखने को मिला।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वकर्मा समाज के नेता एवं समाजवादी पार्टी के पिछड़ा प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष हरेंद्र विश्वकर्मा ने कहा कि समाज के लोग जब तक एकजुट नहीं होंगे, तब तक उनका समुचित विकास संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि भगवान विश्वकर्मा के पांचों वंशजों को भाईचारे और एकजुटता के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लेना चाहिए।
उन्होंने अंगूर के गुच्छे का उदाहरण देते हुए कहा कि एकजुट रहने से समाज की ताकत और महत्व बढ़ता है। उन्होंने शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार और राजनीतिक भागीदारी को समाज के विकास के लिए जरूरी बताते हुए बच्चों को शिक्षित करने तथा युवाओं को रोजगार के साथ उद्यमिता की ओर बढ़ने का आह्वान किया।

हरेंद्र विश्वकर्मा ने कहा कि विश्वकर्मा समाज कारीगर और सृजनकर्ता समाज है। जरूरत इस बात की है कि लोग केवल कारीगरी तक सीमित न रहें, बल्कि उद्यमी बनें और दूसरे लोगों को भी हुनर सिखाकर रोजगार के अवसर पैदा करें। उन्होंने अपने संबोधन में सरकार की रोजगार और कानून-व्यवस्था को लेकर आलोचना भी की तथा कहा कि समाज को अपने भविष्य और अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए।
बलिया से आए दिनेश विश्वकर्मा ने भी समाज को एकजुट करने और सामाजिक एवं राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एकजुट समाज अपनी समस्याओं को मजबूती से उठाने में सक्षम होता है।

वहीं इस कार्यक्रम संयोजक लवकुश विश्वकर्मा ने कहा कि शोभायात्रा में लोहार, ठठेरा, बढ़ई, सोनार और शिल्पकार समाज के पांचों गौरवशाली वंशजों की झांकियों के माध्यम से समाज की विरासत और हुनर को प्रदर्शित किया गया। उन्होंने बच्चों को शिक्षित कर सरकारी नौकरी, रोजगार और राजनीति के क्षेत्र में समाज की मजबूत भागीदारी सुनिश्चित करने का संकल्प दिलाया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता समाज के 90 वर्षीय वयोवृद्ध रामानंद विश्वकर्मा ने की, जबकि संचालन बबलू ठठेरा ने किया। इस दौरान सुरेंद्र विश्वकर्मा, बबलू ठठेरा, डॉ. अरविंद विश्वकर्मा, राम प्रताप विश्वकर्मा, जितेंद्र विश्वकर्मा, कपूर चंद्र वर्मा, शैलेंद्र वर्मा, शिवमोहन ठठेरा, सुभाष चंद्र विश्वकर्मा, सुभाष ठठेरा सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।














